Happy Republic Day 2019: As January 26 is just around the corner preparations are in full swing to make this Republic day a memorable one. This year we will be celebrating the 70th anniversary of our constitution which was framed in 193o but came into effect in 1949. This year our republic day will be graced by the president of South Africa Cyrus Ramaphosa, who will see our spectacular Republic day celebrations. The Republic day parade is organized by the Ministry of Defense and it starts from President’s house Rashtrapati Bhawan to India gate. 

Other than the main Republic Day parade- schools, societies even communities celebrate Republic Day in their own ways. In schools, competitions are held where the students come together to sing patriotic songs, recite Hindi poems, talk about their freedom fighters, host flags, and many more things. In societies and organizations, special events are organized such as hosting of the flag, singing songs, lunch and competitions are held.

So on the occasion of Republic Day here we get you top 5 poems.

1. सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है

करता नहीं क्यूं दूसरा कुछ बातचीत,

देखता हूं मैं जिसे वो चुप तेरी महफ़िल में है

ए शहीद-ए-मुल्क-ओ-मिल्लत मैं तेरे ऊपर निसार,

अब तेरी हिम्मत का चरचा गैर की महफ़िल में है

वक्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आसमान,

हम अभी से क्या बतायें क्या हमारे दिल में है

खैंच कर लायी है सब को कत्ल होने की उम्मीद,

आशिकों का आज जमघट कूच-ए-कातिल में है

यूं खड़ा मक़तल में क़ातिल कह रहा है बार-बार,

क्या तमन्ना-ए-शहादत भी किसी के दिल में है

वो जिस्म भी क्या जिस्म है जिसमें ना हो खून-ए-जुनून

तूफ़ानों से क्या लड़े जो कश्ती-ए-साहिल में है,

हाथ जिन में हो जुनूं कटते नही तलवार से,

सर जो उठ जाते हैं वो झुकते नहीं ललकार से

और भड़केगा जो शोला-सा हमारे दिल में है,

है लिये हथियार दुशमन ताक में बैठा उधर,

और हम तैय्यार हैं सीना लिये अपना इधर

खून से खेलेंगे होली गर वतन मुश्किल में है,

हम तो घर से निकले ही थे बांधकर सर पे कफ़न,

जान हथेली पर लिये लो बढ चले हैं ये कदम

जिन्दगी तो अपनी मेहमान मौत की महफ़िल में है,

दिल में तूफ़ानों की टोली और नसों में इन्कलाब,

होश दुश्मन के उड़ा देंगे हमें रोको ना आज

दूर रह पाये जो हमसे दम कहां मंज़िल में है..

राम प्रसाद बिस्मिल

 

2. बला से हमको लटकाए अगर सरकार फांसी से,

लटकते आए अक्सर पैकरे-ईसार फांसी से।

लबे-दम भी न खोली ज़ालिमों ने हथकड़ी मेरी,

तमन्ना थी कि करता मैं लिपटकर प्यार फांसी से।

खुली है मुझको लेने के लिए आग़ोशे आज़ादी,

ख़ुशी है, हो गया महबूब का दीदार फांसी से।

कभी ओ बेख़बर तहरीके़-आज़ादी भी रुकती है?

बढ़ा करती है उसकी तेज़ी-ए-रफ़्तार फांसी से।

यहां तक सरफ़रोशाने-वतन बढ़ जाएंगे क़ातिल,

कि लटकाने पड़ेंगे नित मुझे दो-चार फांसी से..

राम प्रसाद बिस्मिल

 

3. उठो सोने वालों सवेरा हुआ है।

वतन के फकीरों का फेरा हुआ है।।

उठो अब निराशा निशा खो रही है।

सुनहरी सी पूरव दिशा हो रही है।

उषा की किरण जगमगी हो रही है।

विवंगों की ध्वनि नींद तम धो रही है।

तुम्हे किस लिए मोह घेरा हुआ है।

उठो सोने वालों सवेरा हुआ है।..

वंशीधर शुक्ल

 

4. अरुण यह मधुमय देश हमारा।

जहां पहुंच अनजान क्षितिज को

मिलता एक सहारा

सरस तामरस गर्भ विभा पर

नाच रही तरुशिखा मनोहर।

छिटका जीवन हरियाली पर

मंगल कुंकुम सारा।

जयशंकर प्रसाद

 

5. देखो 26 जनवरी आयी है, गणतंत्र की सौगात लाई है। 

अधिकार दिए हैं इसने अनमोल, जीवन में बढ़ सके बिन अवरोध। 

हर साल 26 जनवरी को होता है वार्षिक आयोजन, 

नई उम्मीद और नये पैगाम से, करते है देश का अभिभादन, 

अमर जवान ज्योति, इंडिया गेट पर अर्पित करते श्रद्धा सुमन, 

2 मिनट के मौन धारण से होता शहीदों को शत-शत नमन। 

सौगातो की सौगात है, गणतंत्र हमारा महान है, आकार में विशाल है, हर सवाल का जवाब है, 

संविधान इसका संचालक है, लोकतंत्र जिसकी पहचान है, 

हम सबकी ये शान है, गणतंत्र हमारा महान है, गणतंत्र हमारा महान है।

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